छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शुरू किया गया नरवा, गरूवा, घुरवा, बाड़ी कार्यक्रम राज्य के ग्रामीण विकास और पर्यावरण संरक्षण की एक समग्र दृष्टि प्रस्तुत करता है। यह कार्यक्रम प्रकृति और मानव जीवन के बीच सदियों पुराने संतुलन को पुनर्जीवित करने का एक प्रयास है।
यह चार सूत्रीय कार्यक्रम क्या है?
नरवा (जल संरक्षण)
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नालों और छोटी नदियों का जल संचयन एवं संरक्षण
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वाटर शेड विकास कार्य
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चेक डैम और स्टॉप डैम निर्माण
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भू-जल स्तर में सुधार
गरूवा (गौ संवर्धन)
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गौवंश का संरक्षण और संवर्धन
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गौशालाओं का विकास
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गोबर की खाद निर्माण
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गौ आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा
घुरवा (कम्पोस्ट खाद)
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कृषि अवशेषों और गोबर से जैविक खाद निर्माण
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रासायनिक खाद पर निर्भरता कम करना
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मृदा स्वास्थ्य में सुधार
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किसानों की आय में वृद्धि
बाड़ी (किचन गार्डन)
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घर के आस-पास सब्जी और फलों की बागवानी
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पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करना
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आय का अतिरिक्त स्रोत
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जैविक खेती को प्रोत्साहन
कार्यक्रम के प्रमुख उद्देश्य
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पर्यावरण संरक्षण: जल, जंगल और जमीन का सतत उपयोग
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कृषि विकास: जैविक खेती और मृदा स्वास्थ्य में सुधार
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ग्रामीण अर्थव्यवस्था: रोजगार सृजन और आय में वृद्धि
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पोषण सुरक्षा: स्थानीय स्तर पर पोषण युक्त भोजन की उपलब्धता
कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएं
1. समग्र दृष्टिकोण
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चारों घटक एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं
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हर घटक दूसरे घटक को सहयोग प्रदान करता है
2. जनभागीदारी
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ग्राम सभा और स्वयं सहायता समूहों की सक्रिय भागीदारी
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सामुदायिक स्वामित्व की भावना
3. पर्यावरण अनुकूल
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पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक का समन्वय
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प्रकृति के साथ सहअस्तित्व को बढ़ावा
लाभ और प्रभाव
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जल संरक्षण: भू-जल स्तर में वृद्धि
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कृषि लाभ: उत्पादकता और गुणवत्ता में सुधार
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आर्थिक लाभ: बेहतर आजीविका के अवसर
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सामाजिक लाभ: समुदायों का सशक्तिकरण
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पारिस्थितिक लाभ: जैव विविधता का संरक्षण
सफलता के उदाहरण
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सूखे नालों का पुनर्जीवन
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गौ आधारित उद्यमों का विकास
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जैविक खेती अपनाने वाले किसान
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पोषण बाड़ियों से लाभान्वित परिवार
भविष्य की योजनाएं
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कार्यक्रम का विस्तार
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तकनीकी संसाधनों का एकीकरण
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बाजार संपर्क सुदृढ़ीकरण
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युवाओं की भागीदारी बढ़ाना
निष्कर्ष
नरवा, गरूवा, घुरवा, बाड़ी कार्यक्रम छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है। यह न केवल पर्यावरण संरक्षण का मॉडल है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का एक सशक्त माध्यम भी है। इस कार्यक्रम की सफलता से स्पष्ट है कि जब प्रकृति और विकास साथ-साथ चलते हैं, तो सतत विकास की राह आसान हो जाती है।
FAQ
Q1: ‘नरवा’ घटक का मुख्य उद्देश्य क्या है?
A1: ‘नरवा’ का मुख्य उद्देश्य नालों और छोटी नदियों का जल संचयन एवं संरक्षण करना, वाटर शेड विकास कार्य करना, चेक डैम और स्टॉप डैम का निर्माण कर भू-जल स्तर में सुधार लाना है।
Q2: ‘गरूवा’ घटक के तहत क्या कार्य किए जाते हैं?
A2: ‘गरूवा’ के अंतर्गत गौवंश का संरक्षण और संवर्धन किया जाता है, गौशालाओं का विकास किया जाता है, गोबर से खाद निर्माण को प्रोत्साहन मिलता है और गौ आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दिया जाता है।
Q3: ‘घुरवा’ का महत्व क्या है और इससे क्या लाभ होता है?
A3: ‘घुरवा’ कृषि अवशेषों और गोबर से जैविक खाद (कम्पोस्ट) निर्माण पर केंद्रित है। इसका महत्व रासायनिक खाद पर निर्भरता कम करना, मृदा स्वास्थ्य में सुधार लाना और किसानों की आय में वृद्धि करना है।